Monday, January 16, 2012
Raju Ramnaresh Kewat
सरकार कहती है कि... चीन के तर्ज पर फेसबुक ,गूगल तथा सभी सोशल नेटवर्किंग साईट पर भारत में भी प्रतिबन्ध लगा देनी चाहिए..?
"चलो... ठीक ही है ... कम से कम देश की युवा श्रमशक्ति तो बचेगी" ?....
लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आई कि... इस मनहूस सरकार को....,
कभी भी.... उसी चीन की तर्ज़ पर "भ्रष्टाचारियों को फांसी " देना क्यों नहीं सूझता है..?
अथवा., जापान के तर्ज़ पर "इस्लाम" पर प्रतिबन्ध लगाना क्यूँ नहीं सूझता है...?
अथवा.. पकिस्तान के तर्ज पर मुल्लो को लात मार के हिन्दुस्थान से भगाना क्यूँ नहीं सूझता है..?
क्या ... कोई तर्ज इनको सूझता है, जिस तर्ज पर कश्मीरी "हिन्दुओ को वापस कश्मीर में" बसाया जा सके ?
क्या.. अमेरिका के तर्ज पर पकिस्तान में घुस कर "आतंकवादी को मारने की कोई प्लान" है ?
अथवा .. देश के युवा खुद ही लीबिया के तर्ज पर चोर नेताओं को घसीट घसीट कर मारने का प्रबंध कर लें ?
क्या कोई तर्ज़ है...... जिस पर कसाब और अफजल गुरु को जल्द फांसी दी जा सके .. ?
नहीं तो.... मैं भारत की घटिया मानसिकता और आतंकवादियों और भ्रष्टाचारियों को पोषित करने वाली सरकार पर धिक्कार है.... जिसके राज में देशभक्तों को लाठी, जेल और काली स्याही मिलती हो जबकि देशद्रोहियों और आतंकवादियों को पांच सितारा सुविधा तथा बिरयानी मिलती हो...!
जहाँ बहुसंख्यक समाज को अल्पसंख्यक से भी बदतर जिन्दगी जीने को भी नहीं मिलता हो !
बेहतर हो कि सरकार इन फालतू के कामों में दिमाग और तर्ज़ ना लगाए.... कहीं ऐसा ना हो कि देश की युवाशक्ति 2014 से पहले ही अपनी-अपनी उँगलियों पर स्याही लगवाने बूथ पर पहुँच जाए और उन्हें ""मिस्र की तर्ज़"" पर लात पर कर दिल्ली की गद्दी से उतार दे .....!
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