Thursday, January 12, 2012

Raju Ramnaresh Kewat कैसे- कैसे बेतुके फ़रमान निकाले जा रहें है? अभी कहते है कि सभी "हाथी" और हथनियों की मुर्तियों को ढक दिया जाये। कल को कहेंगे कि सभी "कमल" के फ़ूलों को उखाड़कर फ़ेंक दो, सभी घरों से "लालटेन" फ़ोड़ दो, कोई "कुर्सी" तोड़ता फ़िरेगा तो कोई "साईकिल"। और जब, जब काँग्रेस की बारी आयेगी तो सबके "हाथ" काट दिये जायेंगे। ये है सियासती दाँवपेंच: अंधेर नगरी चौपट राजा, महँगी है भाजी बि्ना खाये आजा।

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